सस्ती सी ज़िन्दगी की महँगी सी कहानी,
मिटटी का आधा तू आधा हे पानी
वो ख्वाब महँगे, वो चाह मॅहगी, वो रुबाब महँगा,
कमीज महँगी, शान मॅहगी, आंसू पोंछने वाला रुमाल महँगा,
पर सिमटी सी मुस्कराहट, आंसू भी कुतरे से,
उलझी ज़िन्दगियों के चेहरे भी उलझे से,
किसी और को देना था धोका पर खुद को ठग बैठे,
वो ख्वाब महँगे, वो चाह मॅहगी, वो रुबाब महँगा,
कमीज महँगी, शान मॅहगी, आंसू पोंछने वाला रुमाल महँगा,
पर सिमटी सी मुस्कराहट, आंसू भी कुतरे से,
उलझी ज़िन्दगियों के चेहरे भी उलझे से,
किसी और को देना था धोका पर खुद को ठग बैठे,
सब अपनी अपनी कुर्सियों पर ऐंठे,
कौन नही यहाँ झूठ का फलसफा लिखता है, उठता है चलता है और बस चलता हे।
सौ लोगो के बीच अजीब सी वीरानी,
कौन नही यहाँ झूठ का फलसफा लिखता है, उठता है चलता है और बस चलता हे।
सौ लोगो के बीच अजीब सी वीरानी,
सस्ती सी ज़िन्दगी की महँगी सी कहानी।।
कीमती जूतों में बोझिल से पाँव,
चिलचिलाती धूप में बनावटी सी छाँव,
हर कोई जीतने की धुन में लगा है,
चेहरे इतने अपने जैसे कोई ख़ास सगा हो।
पीठ मुड़ते ही अलग सी कहानी,
सस्ती सी ज़िन्दगी की महँगी सी कहानी ||
कीमती जूतों में बोझिल से पाँव,
चिलचिलाती धूप में बनावटी सी छाँव,
हर कोई जीतने की धुन में लगा है,
चेहरे इतने अपने जैसे कोई ख़ास सगा हो।
पीठ मुड़ते ही अलग सी कहानी,
सस्ती सी ज़िन्दगी की महँगी सी कहानी ||