Tuesday, 15 November 2016

चंद जज़्बात - 8



मेरी ही जेब के सिक्के मेरे नहीं,

पत्थर की दीवारों के घर पक्के नहीं,

चौक में गिरती बारिश के हिस्से भी मेरे नहीं,

बस सुख दुःख की शतरंज मेरी, रात ही रात मेरी,

मेरे बक्से में सवेरे नहीं ।। सुधा राम जोशी ।।

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